12/08/2010

कम होते कपडे , बढ़ते दर्शक ........................



आज देखा जाये तो बोलीवुड भी होलीवुड की राह पर चल पड़ा है। हालीवुड की फिल्मो कों भारतयी दर्शको दुवरा इसलिए ज्यादा पसंद किया जाता है क्योंकि ये हीरोइने कम कपडे जो पहनती है । इसलिए । आज बालीवुड की ज्यादातर हीरोइने कम कपड़ो में दिखाई देती है। क्योंकि उनको एक दम टोपलेस होना है......... फिल्म खुवाइश में १६ बार चुमबन देकर और मर्डर में अंगप्रदर्शन कर चुकी हुस्नो की मल्लिका...... मल्लिका शेरावत अपने जिस्म का प्रदर्शन करके देश के साथ- साथ विदेशो में भी अपनी लोकप्रियता बटोर रही है। टीवी चैनल पर आते तमाम विज्ञापन जिसमे अशिश्लता का नंगा नाच देखने कों मिलता । जिससे दर्शक भी उस ब्रांड कों खरीदने में जरा भी देरी नहीं लगाते ....क्योंकि उस विज्ञापन कों बिपाशा ने जो दिखाया है......


ठीक उसी प्रकार से फिल्मो में भी अर्ध नगन का प्रदेअर्शन करके हीरोइने दर्शको कों अपनी और आकर्षित कर रही है । जिस कारण ये रातो रात सुर्खेयो में आ जाती है ... हाल ही रिलीज होने वाली फिल्म " हिस्स" में मल्लिका ने जो न्यूड सीन दिये है ..... जो इस फिल्म में आपको एक नागिन की भूमिका में नज़र आएगी ..... और छाती कों बालो से ढका है । मल्लिका कों सिर्फ इस चीज़ का फायदा होगा की अब उनको देखने वाले दर्शको की तादात और बढ़ जाएगी ....फिल्म हिस्स कों देखने वालो की तादात और ज्यादा बढेगी शायद फिल्म सुपरहिट भी हो जाये . फिल्म कों मीडिया में जगह मिलेगी सो अलग .......... हाल ही में ज़र्मन के एक वैज्ञानिक ने अपने सर्वे में पाया की महिलाओ की ब्रेस्ट कों घूरने से इन्सान की आयु बढती है .....जिससे आज कल की सभी अभिनेत्रिया अपनी ब्रेस्ट कों देखने से जारी भी नहीं कतराती है मैल्लिका भी उनमे से एक है ...... जो इस बात कों सुनकर काफी खुश देखाए पड़ती है ......... बात चाहे यहाँ पर मल्लिका कों हो रही हो या फिर नेहा धूपिया की , या फिर तनु श्री दत्ता की, सेलिना जेटली की या बिपाशा बसु की , ज्यादातर ये अभिनेत्री मीडिया में बने रह ने के लिए अपने अंग प्रदर्शन कों लेकर हमेशा से सुर्खियों का हिसा बनी रहती है .......... देखा जाये तो जिन हीरोइने की न तो मीडिया में चर्चा होती है और न ही उनकी फिल्मे चलती है ॥ क्योंकि वे न तो इस तरह की कोई हरकते जो नहीं करती ....इस लिए वो हमेशा मीडिया से दूर रहती है ...
इस तरह की शरारते कर चुकी शर्लिन चोपड़ा, जिन्होंने टीवटर पर अपनी नगन फोटो लगा कर एक दम से सुर्खियों में आ गयी .हालाकी शर्लिन इतनी सफल अभिनेत्री तो नहीं है .लेकिन फिर भी मीडिया में बने रहने के लिए चर्चा का विषय रहती है.... इसी प्रकार से कपूर खानदान की बेटी करीना भी अछूती नहीं है । बड़ी बहन ने शायद अपने करियर की उचाई कों इतनी जल्दी न छुआ हो। लेकिन छोटी बहन ने मात्र एक दशक में , बोलीवुड में अपनी नयी पहचान "बेबो " नाम से बनायीं ......जिसे आज सारा बोलीवुड बेबो के नाम से जानता है ......कुर्बान फिल्म में करीना टोपलेस इसलिए हुई की उन्होंने अपनी नगन पीठ जो दिखाई ...... फिल्म ने दर्शको इस लिए अपनी और आकर्षित किया .........तनु श्री दत्ता भी टोपलेस होने के चक्कर में "आशिक बनाया आपने "में जो गाना फिल्माया ही उसी ने दर्शको कों अपनी और आकर्षित किया ...६०-७० का दशक में जो हीरोइने टोपलेस हुई उनमे से रेखा , शबाना आज़मी , ज़ीनत अमान , मंदाकनी , इत्यादी .... एसा ही कुछ देहरादून में मुझे देखने कों मिला जहा पर लड़के लडकियों का पहनावा एकदम अलग है । यहाँ के पहनावे ने भोपाल , दिल्ली जैसी बड़ी सिटी कों पीछे धेकेल सा दिया है .......लडकिया अपने माता पिता के साथ मिनी इस्कर्ट में घुमती फिरती है जो अपने आप में बड़ी शर्म की बात है .... खेर पहने भी क्यों न ज़माना ग्लोब्लएजेसन का जो है ........
कुल मिलाकर ऐसे दिराशियो और फिल्मो कों देखकर यही कहा जा सकता है....की सिर्फ मीडिया में बने रहने का ये सबसे अच्छा तरीका है ..इससे दर्शक तो आकर्षित होते ही है ..... साथ ही साथ यह सफल होने का एक अच्छा तरीका है ...

10/08/2010

ये दोस्ती दिवस या फिर कोई और दिवस ज़रा सोचिये ........



दोस्ती दिवस यानि फ़्रेन्डशिप डे.... दोस्तों इन दिनों मेरा देहरादून किसी काम से आना हुआ है ॥ ०१ अगस्त कों मेरे परम मित्र विवेक मिश्रा का सुबह -सुबह मेरे पास फोन आया....... और उसने सीधे -सीधे मुझे फोन पर दोस्ती दिवस की बधाई दे डाली और कहा मित्र आपको फ्रेंडशिप डे की लख लख बधाईया एक बार तो में सोच में पड गया की मेरा मित्र किस लिए मुझे बधाई दे रहा है। जब उसने कहा मित्र आज आज दोस्ती दिवस है । इस लिए आपको बधाई दे रहा हूँ । ..... क्या आपको नहीं पता आज फ्रेंडशिप डे है ........? मैंने कहा नहीं तो ।........................ फिर मैंने उसको सीधे- सीधे बताया की मित्र देखो एक दिन के लिए फ्रेंडशिप डे कह देने से लोग सदा के लिए दोस्त नहीं बनते दोस्ती होती है तो बस दिल से ............ अगर आपके लिए किसी के प्रति ज़रा सा भी प्रेम , इसनेह , दया , जैसी भावना है तभी आपकी दोस्ती आगे बढ़ सकती है .................
.........खेर .... मैंने मदर डे, फादर डे, किस डे , रोज़ डे। परेंट्स डे ...................... इन सभी के बारे मैंने अक्सर सुना है पर इस फ्रेंडशिप डे कों पहिले बार सुना (मेरे लिए तो पहिले बार लेकिन ओरो के लिए शायद कितने ही बार हो ..........)मुझे नहीं पता मेरे भारत में कितने दिवस रोज़ मनाये जाते है... जैसे १ अगस्त कों मेरा किसे काम से सिटी के अंदर जाना हुआ तो तो मैंने देखा शहर की तमाम सिटी बसों में नव युवक जोड़ो की भीड़ देखने कों मिली, साथ ही साथ शहर की तमाम दुकाने और रेस्टोरेंट कों सजते हुए देखा गया । जंहा पर हर नव युवक अपनी महिला मित्र के लिए हैण्डबैंड और फूल जैसी चीज़े खरीदते हुए दिखाई पड़े ............परेड ग्राउंड (देहरादून ) के पास गाँधी पार्क आज इन लोगो के लिए ये मीटिंग पॉइंट बना हुआ था । जब में इस गार्डन में गया तो मैंने देखा की पार्क के हर एक में नव युवक अपनी महिला मित्र कों लेकर बेठे थे ..............पार्क की ऐसी कोई भी भी जंगह नहीं थी जंहा पर में बेठ सकता ..... लेकिन मेरे बेठने के लिए वह पर जंगह नहीं थी । देहरादून का गाँधी पार्क शहर का सबसे बड़ा पार्क माना जाता है। अब इस बात से अंदाज़ा लगा सकते है की की पार्क में कितनी भीड़ होगी और बगीचे के अंदर नव युवक जोड़ो की चहल कदमी करते हुए देखे गया । एक दुसरे से बात करके कहते की आप बहुत ही अच्छे हो। तो कोई कहता की आप मेरा ज़िन्दगी भर साथ दोगी न इस परकार के तमाम वाकये सुनने कों मिले ............. लेकिन मेरे भारत की इस यंग ब्लड जेनरेसन कों आखिर हो क्या गया .... जो देश की संस्क्रती कों डूबने पर तुली है .... अगर उनमे से में किसे ये पूछ लेता की देश में कुछ चले रहा है तो शायद ही कोई बता पाता .... लेकिन नहीं वेस्टर्न कल्चर कों आगे बढ़ने में लगे हुए है .......... देहरादून में मेने यंहा के युवको में एक अलग सा ट्रेंड देखा जो मैंने भोपाल में भी नहीं देखा .........भारतीय कल्चर की धजजी उड़ाते ये युवक क्या आपनी साख बचा पाएंगे या फिर प्रेम की चाह रखने वाले ये युवक डिप्रेसन का शिकार होंगे बिलकुल हमारे दोस्त सनसनी की तरह ? इन का भविष्य क्या होगा कहना मुश्किल है ................ जब मेरी नज़र जब वंहा पर बेठे गेर महिला मित्र युवको पर गयी तो मैंने पाया की ये युवक अपनी मानसिकता के साथ गुना भाग लगा रहे थे .... .